ये थे भारत के महान राजा,जिनसे हार गया था शक्तिशाली अकबर भी

छत्रपति शिवाजी महाराज एक कुशल और महान शासक थे, वह चाहते थे कि मराठों के साम्राज्य का विस्तार होना चाहिये और उनका एक अलग से राज्य स्थापित हो। अपने इसी सपने को साकार करने के लिए शिवाजी महाराज ने मात्र 28 वर्ष की उम्र से अपनी एक अलग से सेना एकत्रित करनी शुरू कर दिया था और उन्होंने अपनी योग्यता के बल पर मराठों को संगठित करके अलग मराठा साम्राज्य की स्थापना की।
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भारतीय इतिहास में सबसे ज्यादा शिवाजी महाराज मराठा शासन के बहुत ही लोकप्रिय और राजा थे. उनकी लोकप्रियता को इससे भी देखा जा सकता है कि आज भी महाराष्ट्र के लोगों की जुबान से उनकी शौर्यता के किस्से सुनने को मिलते हैं.शिवाजी महाराज उस समय छापामार युद्ध प्रणाली का प्रयोग किया करते थे। उन्होंने एक जहाजी बेड़ा का भी निर्माण किया था इसलिए शिवाजी महाराज को आधुनिक नौसेना का जनक भी माना जाता है।शिवाजी महाराज बहुत दयालु प्रवर्ति के राजा थे ,राजा थे। वह जबरदस्ती किसी से भी लगन नहीं लेते थे। उन्होंने बच्चों, ब्राह्मणों व औरतों के उत्थान के लिए बहुत कार्य किये थे । बहुत-सी प्रथाओं को बंद भी किया। उस समय मुगल हिंदुओं पर बहुत अत्याचार करते थे, जबरदस्ती इस्लाम धर्म अपनाने को मजबूर करते थे, ऐसे समय में शिवाजी महाराज मसीहा बनकर आए थे। शिवाजी महाराज ने एक मजबूत नेवी की स्थापना की थी जो समुद्र के अंदर भी तैनात रहती थी और दुश्मनों से रक्षा करती थी, उस समय अंग्रेज, मुगल दोनों ही शिवाजी महाराज के किलों पर बुरी नजर डाले बैठे थे इसलिए उन्हें इंडियन नेवी का पिता भी माना जाता है।
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महाराणा प्रताप ऐसे राजा थे, उन्होंने मरते दम तक मुगलो का शासन स्वीकार नहीं किया था मुगलों का शासन उनका मन बचपन से ही मातृभूमि की भक्ति में रम गया था. उनके बारे में कहा जाता है कि उन्होने अपना पूरा जीवन राष्ट्र, कुल और धर्म की रक्षा के लिए अर्पित कर दिया.
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वह अकबर जैसे बड़े शासक का मुकाबला करने से भी पीछे नहीं हटे थे, हालांकि वह अकबर से जीत न सके थे और जंगलों में भटकने को मजबूर हुए. इसके बावजूद उनका साहस नहीं टूटा और महाराणा प्रताप चित्तौड़गढ़ वापस लेने में कामयाब रहे.और उस समय का सबसे बड़ा शासक अकबर भी उनकी तारीफ करता था कहते हैं कि महाराणा ने प्रण लिया था कि जब तक वह चित्तौड़गढ़ वापस नहीं लेंगे तब तक चैन की सांस नहीं लेंगे, जिसे उन्होंने पूरा भी किया.जानकार बताते हैं कि बहुत कम उम्र से उनमें देशभक्ति की भावना थी. वह एक कुशल शासक होने के साथ-साथ तेज रणनीतिकार थे. उनकी सेना में एक लाख से भी ज्यादा सैनिकों की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है.

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