ऐसा था रजनीकांत का बस कंडक्टर से साउथ सुपरस्टार बनने का सफर
नमस्कार दोस्तों आज हम बात करने वाले है इंडिया के बहुत बड़े स्टार रजनीकांत जी के बारे में। बिना संघर्ष के कोई भी बड़ा इंसान नहीं बनता और इसकी सबसे बड़ी मिसाल स्वयं रजनीकांत जी है
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जिन्होंने बतौर कंडेक्टर अपने पारी की करते हुए फिल्मी जगत के सबसे बड़े सुपरस्टार बन गए है।हाल ही में साउथ के सुपरस्टार रजनीकांत ने हाल ही में राजनीति में अपनी पारी की शुरुआत करने का ऐलान किया है। फिल्मी करियर के बाद अब 67 साल की उम्र में अब अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत करेंगे। तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव में रजनीकांत भी मैदान में होंगे। आपको बता दें कि रजनीकांत ने अपनी पारी की शुरुआत बतौर कंडक्टर की थी इसी दौरान उन्हें फिल्म का ऑफर मिला और संघर्ष करते हुए ये साउथ के सुपरस्टार बन गए। आज हम आपको बताने जा रहे हैं उनकी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ से जुड़ी कुछ इंटरेस्टिंग बातें..
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12 दिसंबर 1950 को बेंगलुरु के एक मराठी परिवार में जन्म हुआ था रजनी बहुत संपन्न परिवार से नहीं थे। रजनी का असली नाम शिवाजी राव गायकवाड़ है। जीजाबाई और रामोजी राव की चार संतानों में शिवाजी सबसे छोटे थे। इनकी स्कूलिंग बेंगलुरु में हुई थी।
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- महज चार साल की उम्र में ही रजनीकांत ने अपनी मां का साथ खो दिया था। घर की माली हालत बहुत अच्छी नहीं थी। इसलिए इन्होंने सब तरह के काम किए। रजनीकांत कुली से लेकर बस कंडक्टर जैसे काम कर चुके हैं। बस में अपने टिकट काटने के अनोखे अंदाज की वजह से ये बस ड्राइवर्स और कंटक्टर्स के बीच बहुत पॉपुलर हुआ करते थे।
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एक्टर बनने का सपना पूरा करने में रजनीकांत के दोस्त राज बहादुर में बहुत मदद की थी। इन्होंने ही रजनीकांत को मद्रास फिल्म इंस्टीट्यूट में दाखिला लेने के लिए के लिए मोटिवेट किया था रजनीकांत के लिए ऐसा कर पाना आसान नहीं था। तब ये और कुछ और दोस्त उनकी मदद के लिए आगे आए, जो उनकी ही तरह बस कंडक्टर थे। एक्टिंग सीखने के दौरान ही इन्होंने तमिल भी सीख ली थी।
हाल ही में उनकी फिल्म रोबोट 2 आने वाली है जो उनकी पिछली सुपरहिट फिल्म रोबोट का रीमेक है,
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इसी बीच रजनीकांत की मुलाकात फिल्म डायरेक्टर के. बालचंद्र से हुई। इन्होंने ही रजनीकांत को फिल्म 'अपूर्वा रागनगाल' में मौका दिया। इसमें कमल हासन और श्रीविद्या भी थीं। हालांकि, इसमें इनका छोटा-सा नेगेटिव रोल था। इसके बाद इन्हें शुरुआती दो-तीन साल तक ऐसे में ही रोल मिले।
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नेगेटिव कैरेक्टर पएल निभाने के बाद रजनीकांत पहली बार अपनी विलेन की इमेज तोड़ते हुए फिल्म 'भुवन ओरु केल्विकुरी' में बतौर हीरो नजर आए । मुथुरमम और रजनीकांत की जोड़ी ऑडियंस को खूब पसंद आई और इन्होंने तकरीबन 25 फिल्मों में साथ काम किया था
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रजनीकांत की 'बिल्ला' बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल साबित हुई, जो साल 1978 में आई अमिताभ बच्चन की हिट फिल्म 'डॉन' की रीमेक थी। वहीं, इन्हें पहली बार 'मुंदरू मूगम' के तमिलनाडुग गवर्नमेंटने साल 1882 में बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड दिया था।
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फिल्म 'बाशा' से रजनीकांत सुपरस्टार बने थे, जो साल 1995 में रिलीज हुई थी। इसने बॉक्स ऑफिस के कई रिकॉर्ड्स तोड़ दिए थे। वहीं, इन्होंने तमिल फिल्मों को इंटरनेशनल स्टेज तक पहुंचाया। इनकी 'मुथू' जापान में रिलीज होने वाली पहली तमिल फिल्म थी। इसके बाद साल 2017 में इनकी 'चंद्रमुखी' तुर्की और जर्मन में रिलीज हुई थी। 'शिवाजी' इनकी पहली फिल्म है जो यूके और साउथ अफ्रीका में बॉक्स ऑफिस पर टॉप पर थी।
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रजनीकांत ने अपने फिल्मी करियर के महज 10 सालों में ही 100 फिल्में पूरी कर ली थी। फिल्मों में में आने से पहले रजनीकांत ने अभिनय की शुरुआत कन्नड़ नाटकों से की थी। इन्होंने दुर्योधन की भूमिका निभाई थी, जिससे ये बहुत पॉपुलर हुए थे।
रजनीकांत ने पहली बार तमिल फिल्मों में एनिमेशन इंट्रोड्यूस किया था। 'राजा चायना रोजा' पहली फिल्म थी, जिसमें एनिमेशन शामिल किया गया था।
रजनीकांत ने तमिल, हिंदी, मलयालम, कन्नड़ और तेलुगु के साथ एक बांग्ला फिल्म में भी काम किया है। इनकी पहली हिंदी फिल्म 'अंधा कानून' की थी। वहीं, बांग्ला फिल्म का नाम 'भाग्य देबता' था।
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